navratri-festival-in-hindi-featured-image

नवरात्री – त्यौहार, महत्त्व और बहुत कुछ!

‘नवरात्री,’ यह दो शब्दों का मेल है। ‘नव’ मतलब ‘नौ’ और ‘रात्री’ मतलब रातें। हर्ष, उल्लास, श्रद्धा, भक्ति से भरी नौ रातें साल में दो बार मनाई जाती है, पहली – अप्रैल-मई में (चैत्र-नवरात्री) और दूसरी – सितंबर से अक्तूबर के महीनो में (शरद-नवरात्री)। शरद-नवरात्री बड़े ही परंपरागत तरीके से नौ दिन और नौ रातों तक मनाई जाती है, जिसका समापन दशहरे के दिवस होता है। इन नौ दिनो में देवी पार्वती के विविध रूपों को पूजा जाता है।
निम्नलिखित अनुक्रम से देवी पार्वती के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है:

  1. देवी शैलपुत्री, जो सती का अवतार मानी जाती है, प्रथम पूजा की मानकरी है।
  2. देवी माँ ब्रहमचारिणी, जो द्वितीय पूजा की मानकरी है।
  3. देवी चंद्रघंटा, जो अपने भक्तों के प्रति असीम प्रेम और शत्रुओं के प्रति निर्दयता के लिए जानी जाती है, तृतीय पूजा की मानकरी है।
  4. देवी कुशमंदा, जो प्रकाश, खुशी, शक्ति और यश की द्योतक मानी जाती है। ऐसा कहा जाता है की वह स्वयं सूर्य देवता की सलाहकार हैं। इनकी पूजा चौथे दिन की जाती है।
  5. देवी स्कंदमाता, जो भगवान कार्तिकेय की माता है, वह शांति, सुधनता और यश के लिए पूजी जाती है। उनकी उपासना पाँचवे दिन की जाती है।
  6. देवी कात्यायिनी, राक्षस महिषासुर का वध करने वाली, छठे दिन के पूजा की मानकरी है।
  7. देवी कालरात्री, जो अंधकार को दूर करती है और अपने भक्तों को बच्चों सा प्यार करती है, उनकी आराधना सातवे दिन की जाती है।
  8. देवी महागौरी, जो देवी पार्वती का सबसे सुंदर रूप मानी गयी है, वह नवरात्री के आठवें दिन पे पूजी जाती है।
  9. देवी सिद्धीदात्री, जो ऐश्वर्य एवं यश प्रदान करती है, उनकी पूजा के साथ नवरात्री का आखरी दिवस मनाया जाता है।

names-of-maa-durga-in-navratri-festival-in-hindi

पूरे भारतवर्ष में लोग इन्ही दिनों में ‘कन्या पूजा’ करते हैं, जब नौ कुँआरी लड़कियों को घर बुलाकर देवी पार्वती के नौ रूपों का सम्मान देते हुए उन्हे पूजा जाता है। भोजन में पारंपरिक रूप से काले चने, पूरी और हलवा बनाया जाता है। इन नौ कुँआरी लड़कियों को भोजन के साथ कुछ भेंट, कपड़े, आभूषण, इत्यादि दिये जाते हैं। कन्या पूजा की प्रथा पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र और कर्नाटक के राज्यों में बड़े प्रेम से मनाई जाती है।

माँ पार्वती के इन विविध अवतारों के पूजन के साथ ही और भी वैविध्यपूर्ण प्रथाओं का भी पालन होता है। दुर्गा माँ के भक्तगण पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं और दिन में केवल एक ही बार भोजन ग्रहण करते हैं। बाकी वक्त फलों का रस, फल तथा सूखे मेवे का ही ग्रहण करते हैं। हर दिन प्रातः स्नान के पश्चात व्रत रखने वाले सभी परिजन दुर्गा माँ की पूजा-अर्चना भी करते हैं।

नवरात्री का समय वर्षा ऋतु के अंत में तथा शिशिर/शीत काल के पहले होता है। नवरात्री का समापन शीत काल के आगमन की सूचना देता है। इस दौरान धान की खेती होती है और इसके लिए माँ अन्नपूर्णा (जो की माँ उत्पन्ना/धरती माँ के नाम से भी जानी जाती है) का पूजन उसके प्रति कृतज्ञता दर्शाने के लिए किया जाता है।

जैसे एक माँ अपने बच्चों की खुशी और सुरक्षा को लेकर सजग और सचेत होती है, वैसे ही माँ पार्वती अपने हर अवतार में अपने संसार के सभी परिजनों के लिए मंगलदायी और उनकी रक्षा के लिए संकटनाशीनी का रूप धारण कर लेती है।

नवरात्री कहाँ-कहाँ मनाई जाती है?

यह उत्सव वैसे तो पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है, खासतौर से गुजरात, पंजाब, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और दक्षिण राज्यों के कई शहरों में। हर एक जगह में इसे मनाने के तरीकों में भिन्नता है जो की वहाँ के अलग-अलग रीति-रिवाज़ और परंपरा के अनुरूप है।
आएँ हम भी एक नज़र इस पर गौर कर लेते हैं:

गुजरात:
पश्चिमी भारत में स्थित गुजरात नवरात्री उत्सव के दौरान एक अलग ही रंग और दीपों का गहना धारण कर लेता है। यहाँ लोग नवरात्री के आगमन से पूर्व ही तैयारीओं में जुट जाते हैं खास करके महिलाएं, जो बड़े ही रंग-बिरंगी वस्त्रों और आभूषणों से लिप्त, पूरे नौ दिन का माहौल ही रंग देती हैं।

navratri-garba-dance-image
‘गरबा’ यह गुजराती नृत्य का प्रकार है, और इसका महत्त्व नवरात्री के त्योहार में विशेष है। इसका अनुभव पूरे नौ दिन में प्रतीत होता है। नए वस्त्र, परिधान, आभूषण आर विविध प्रकार के व्यंजनों से ईन नौ दिनों का त्योहार मनाया जाता है। वास्तव में गरबा का सच्चा आकर्षण इन्ही वस्त्रों और आभूषणों में व्यक्त होता है।
औरतें और कन्याएँ ‘चनिया-चोली’ नामक वस्त्र धारण करती हैं जिसमें उपर छोटी चोली और साथ में नीचे सुंदर नक्षीकारी और कलकारी वाला घागरा होता है। इनके उपर बिंदीयाँ, शीशे और चमकीले पत्थर जड़े होते हैं। पुरुष भी पारंपरिक गुजराती ‘केडीयू और धोती’ धारण करते हैं। यह वस्त्र विविध रंग और डिज़ाइनों में उपलब्ध होते हैं।

पश्चिम बंगाल:
नवरात्री का उत्सव जो की दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है, पश्चिम बंगाल की आन-बान-शान है। हर दुर्गा पूजा के दौरान, पश्चिम बंगाल एक दुल्हन से भी बढ़कर सजा-धजा नज़र आता है।

navratri-festival-west-bengal-maa-durga-puja-image
धनुची नाच और सिंदूर खेला यह पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की खासियत है। इस दौरान पश्चिम बंगाल की यात्रा एक अनोखा ही अनुभव है।

दिल्ली:
यूं तो भारत की राजधानी दिल्ली की अपनी कोई प्रथा या परंपरा नहीं है, पर यहाँ पे बसे हुए नागरिकों ने हर एक राज्य की परंपरा और प्रथा को अपनाया है और उतनी ही खुशी से मनाया भी है। बड़े-बड़े मैदानों में गरबा-डांडिया का लुत्फ उठाने लोग सुंदर परिधान पहनके जाते हैं।

पंजाब:
पंजाब में नवरात्री पर्व अनोखे से तरीके से मनाया जाता है। यहाँ हर घर अपने तरीके से देवी की पूजा करता है तथा लोग अपने परिजनों और मित्रों के साथ ‘माता का जगराता’ मनाते हैं। यह जगराता रात-भर देवी माँ के नामस्मरण और भजनों से गूंज उठता है। पंडितों को पूजा और हवन करने के लिए खास न्योता देकर उनका आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है।

पंजाब के अलावा हिमाचल, हरयाना और उत्तर-प्रदेश के लोग भी इस पर्व को खुशी से मनाते हैं।

दक्षिण भारत:

दक्षिण भारत के कई राज्यों में नवरात्री पर्व एक निजी त्योहार के तौर पर मनाया जाता है और सार्वजनिक रूप पर कम औसत में भेंट-वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाता है। इस समय नए वस्त्र-आभूषण पहन लोग अपने परिजनों के साथ माँ पार्वती का पूजन तथा नारियल से बने पकवानों का सेवन करते हैं।

आंध्र-प्रदेश में कुमारिका और ब्याहता औरतें अपने सफल वैवाहिक जीवन के लिए माँ गौरी की उपासना करती हैं। इस त्योहार में विशेष रूप से चर्चित तथा बड़ी धूम धाम से मनाए जाने वाली नवरात्री और दशहरा समारोह कर्नाटक में स्थित मैसूर शहर का है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ती है।

हिमाचल प्रदेश में बहुचर्चित ‘कुल्लू-दशहरा’ बड़े ही धूम धाम से पूरे 10 दिन मनाया जाने वाला उत्सव है। छत्तीसगढ़ एक अनोखे ढंग से नवरात्री मनाता है और यह पूरे 75 दिन चलने वाला एक सांस्कृतिक उत्सव है!
नवरात्री सार्वजनिक तथा निजी तौर पर भी अलग-अलग संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है जिससे इस उत्सव का महत्त्व कई गुना बढ़ गया है।

नवरात्री के दौरान विशेष रूप से देखनीय समारोह:

गरबा और डांडिया रास:
गरबा गुजरात का बहुत ही प्रचलित और लोकप्रिय नृत्यप्रकार है जिसमें विशेष तौर पे हाथों की मुद्राओं और गोल चक्कर में किए गए फेर समाविष्ट है।
दो छोटी लकड़ियाँ (डांडिया) का इस्तेमाल करके डांडिया रास खेला जाता है। जोशीले गानों के साथ डांडियों की आवाज़ से उत्पन्न नाद नवरात्री के उत्सव में नयी स्फूर्ति भर जाता है। गरबा और डांडिया के लिए खुले मैदान एक योग्य जगह है जहाँ कई सारे लोग आपस में मिलकर इसका आनंद उठा सकते हैं।
स्त्री-पुरुषों द्वारा पहने गए वस्त्र-आभूषण पूरा माहौल रंग-बिरंगा कर देते हैं। यही नहीं, डांडिया को भी उतने ही चाव से सजाया जाता है जिससे नृत्य देखने वालों एवं खेलने वालों का आनंद दुगना हो जाता है।

धुनाची नाच:
गरबा और डांडिया की तरह धुनाची नाच एक विशेष बंगाली नृत्य कला है जिसके बगैर बंगाली दुर्गा पुजा की परंपरा अधूरी है।

dhanuchi-nach-navratri-festival-celebrations-image
इसमें कलाकार बड़े ही फुर्ती और नज़ाकत से नृत्य मुद्राएँ करते हुए और साथ ही मिट्टी का मटका जिसमें जलते हुए नारियल के छिलके और कपूर हाथ में थामे हुए देवी की आराधना करते हैं। यह नृत्य माँ दुर्गा समक्ष संध्या आरती के समय किया जाता है। यह नृत्य बंगाली धाक (एक प्रकार का नाद वाद्य) के साथ किया जाता है।

कोलू:
यह एक दक्षिण भारतीय नवरात्री उत्सव का प्रकार है। कोलू चीनी मिट्टी की बनी मूर्तियाँ और गुड़ियाँ होती हैं जिनहे हाथ से सजाया जाता है। इन्हें सजाने के बाद इनकी पूजा की जाती है। इनके दर्शन के लिए परिवार-परिजन इकट्ठे होकर वस्त्र, पकवान, भेंट आदि का आदान-प्रदान करते हैं।
अगर आपका कोई दोस्त या परिजन इस अनूठी प्रथा का पालन करते हैं, तो हिचकिचाये नहीं…जल्द से जल्द अवकाश निकाले और इसका खूब आनंद लें।

भोंडला:
यह एक मराठी प्रथा है जो नवरात्री में मनाई जाती है। नवरात्री के प्रथम दिन से कोजागिरी पुर्णिमा तक इस पर्व को मनाया जाता है।
इसमें औरतें एक खास मराठी पहनावा जिसे ‘नववारी साड़ी’ कहते हैं, वह पहनके पारंपरिक गीत और नृत्य के लिए इकट्ठा होती हैं।

BHONDLA
एक फूलों से सजाये हुए हाथी की छोटी सी प्रतिमा को बीच ज़मीन पर रख कर उसके इर्दगिर्द बैठकर सभी उम्र की महिलाएं वैवाहिक जीवन के आधारपूर्ण गाने गाती हैं तथा नृत्य करती हैं।
सभी औरतें अंत मे अपने-अपने घर से बनाए हुए व्यंजनों का स्वाद एक साथ बैठकर लेती हैं और इसी से भोंडले की समाप्ती होती है।

सफर करने की असीम इच्छा और वैविध्यपूर्ण रंगबिरंगे उत्सवों का मज़ा आपको इस दिशा में खींचकर ज़रूर लाएगा, ना केवल नवरात्री के लिए, बल्कि और भी बहुत कुछ अनुभव करने के लिए।
क्या आप गंतव्य विकल्पों के बारे में सोच-सोचकर दुविधा में पड़ गए हैं?

गंतव्य तक पहुँचने के विविध विकल्प:

आपके मनचाहे स्थान तक पहुँचने का असली मज़ा सफर में ही तो है! बशर्ते थोड़ी सी जानकारी, थोड़ी सी तैयारी और मन में ढेर सारा उत्साह हो!

हवाई यातायात:
भारत में कई सारे स्थान अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डों से जुड़े हुए हैं, जिनमें मुख्य रूप से मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु सर्व प्रथम आते हैं। यह हवाई अड्डे दुनिया के सभी प्रमुख शहरों को हवाई मार्ग से जोड़े हुए हैं। उसके अलावा कई सरकारी और निजी एयरलाइंस अनेक भारतीय शहरों के लिए विभिन्न यात्रा मार्ग प्रदान करती हैं।
अंतर्गत हवाई व्यवस्था बहुत सारे शहरों और नगरों को एक दूसरे के साथ जोड़ती है।

रेल यातायात:
रेल का सफर एक अविस्मरणीय गतिविधि है। वह आपको देश के सुंदर और बेहतरीन दर्शनीय प्रदेशों से परिचय करवाती है। भारत देश में दुनिया का सबसे विशाल रेल नेटवर्क है। यात्री, प्रवासी अपनी रेल टिकट अधिकृत सरकारी वैबसाइट www.irctc.co.in से आरक्षित करवा सकते हैं।

सड़क यातायात:
सड़क से किया हुआ सफर मुसाफिरों के लिए एक ज्ञान के भंडार जैसा है। रास्ते सिर्फ योजक का काम नहीं करते, बल्कि जीवन में अनुभव किए जाने वाली बड़ी-छोटी चीजों का दर्पण है। इस मार्ग से यातायात कर आपको आस-पास के अजूबे, तौर-तरीके और नैसर्गिक खूबसूरती का आनंद लेने को मिलता है।
आपके सफर के योजना के अनुसार आजकल कई विकल्प उपलब्ध है। आप चाहे तो स्वयं फोर-व्हीलर या टू-व्हीलर बुक कर सकते हैं या किसी अधिकृत बस अथवा टॅक्सी सेवाएँ उपलब्ध कर सकते हैं।
एक राहगिर की सफर की असीम इच्छा के लिए अनेक विकल्प उसकी जिज्ञासा पूरी करने हेतु उपलब्ध हैं। गौरतलब है की आप अपने सफर की तैयारियों में अधिकृत सरकारी या निजी एजन्सियों को अपना सहभागी ज़रूर बनाए।
विदेशी नागरिकों के लिए अपना वीज़ा एवं पासपोर्ट हुमेशा साथ रखना अनिवार्य है।

नज़दीकी पर्यटन स्थलों की उपलब्धि:

नवरात्री पर्यटन का आनंद दुगना करने के लिए नज़दीकी ऐतिहासिक तथा मनोहर नैसर्गिक स्थानों को अनदेखा कैसे कर सकते हैं?

साबरमती आश्रम:
गुजरात में नवरात्री का जलवा अवर्णनीय है जिसे सिर्फ अनुभव किया जा सकता है। नवरात्री का उत्सव देखने के अलावा गुजरात की नैसर्गिक खूबसूरती भी दर्शनीय है। वहाँ के कई सुंदर तटीय स्थानों में से एक खास जगह है साबरमती आश्रम।
साबरमती आश्रम के ऐतिहासिक महत्त्व का मूल कारण है भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के मुख्य अहिंसक सैनानी, भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी। उनके जीवन काल का काफी हिस्सा यहाँ पे बिताया हुआ था। उनके जीवनशैली और स्वांतंत्रता संग्राम संबन्धित अन्य चीज़ें जानने के लिए आप इस आश्रम में एक बार अवश्य जाएँ और अनुभव करे आज़ादी के पहले उस समय को।

सोमनाथ मंदिर:
यह सदियों पुराना भगवान शिव का ऐतिहासिक मंदिर है जिसने कई आक्रमण और विध्वंस देखे और सहे हैं। यह मंदिर हर बार खड़ा हो पाया, जो इसके प्रतिस्कन्दन का प्रतीक है। समुद्र के निकट सौराष्ट्र में स्थित यह मंदिर वास्तु-कला का एक आलौकिक नमूना है जिसे देखने के लिए अनगिनत श्रद्धालु, वास्तु-कला के विद्यार्थी और पर्यटक आते हैं। इसी मंदिर से कुछ ही दूरी पे गिर के प्रसिद्ध शरणस्थल है जहा एशियाटिक सिंह पाया जाता है।

सुंदरबन:
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के साथ-साथ सुंदरबन देखना न भूलें। यह एक ‘वर्ल्ड हेरिटेज साईट’ है और असाधारण ‘मैनग्रोव्स’ का घर है। और जब बात सुंदरबन की हो तो ‘रॉयल बेंगाल टाइगर’ को कैसे भूल सकते हैं??

sundarban
By Soumyajit NandyOwn work, CC BY-SA 4.0, Link

यह पूर्ण इलाका वन-विभाग की देख-रेख में आता है और यहाँ पर रहने की और अन्य व्यवस्थाएँ अधिकृत एजन्सियों के द्वारा ही की जा सकती हैं।

हावड़ा सेतु (रबीन्द्र सेतु):
हुगली नदी पर स्थित यह मजबूत पुल कोलकाता तथा हावड़ा नगरों को जोड़ता है। भारतीय स्वांतंत्रता से पूर्व ब्रिटिश काल में बनाया गया ये सेतु पर्यटकों में बहुत ही लोकप्रिय आकर्षण है। आज यह सेतु विश्व के सबसे व्यस्त ‘कंटीलेवर’ पुलों में से एक है!
आप कोलकाता आएँ और खरीदी का मज़ा न लें ऐसा हो ही नई सकता। यहाँ की ‘कोलकाता सिल्क साड़ीयाँ और कॉटन के कपड़े बहुत ही प्रसिद्ध हैं।

आपके लिए इन पर्यटन स्थल के विकल्पों का कोई अंत नहीं! कोंकण के निर्मल समुद्र तट, मुंबई का गेटवे ऑफ इंडिया, औरंगाबाद के अजंता-एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र के कुछ प्रसिद्ध गंतव्य है। अगर अप पंजाब जा रहे हैं तो अमृतसर के गोल्डेन टेंपल (हरमंदिर साहब) में माथा टेकना न भूलें। दक्षिण भारत के कूर्ग, मुन्नार, ऊटी जैसे हसीन पर्वत-स्थली आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं!

अपने उत्साह को कम न होने दें, क्योंकि नवरात्री तो केवल शुरुवात है। दशहरा नवरात्री के पश्चात 10वे दिवस पे मनाई जाती है जिसका भारत के हिन्दू समुदाय में खास महत्त्व है।
हमारे साथ बने रहिए और जानिए बुराई पर अच्छाई की जीत के पीछे की कहानी!

इस पोस्ट को अंग्रेजी में यहाँ पढ़ सकते हैं|

Print Friendly, PDF & Email

One thought on “नवरात्री – त्यौहार, महत्त्व और बहुत कुछ!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.